पागल लोगों को बिजली का झटका क्यों दिया जाता हैं? Latest facts in Hindi
दोस्तों, आपने फिल्मों में अक्सर देखा होगा कि मानसिक बीमारी से परेशान मरीजों को बिजली का झटका दिया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि असल जिंदगी में इस उपचार को क्या कहते हैं और डॉक्टर इसका इस्तेमाल क्यों करते हैं? दरअसल, इस चिकित्सा प्रक्रिया को इलेक्ट्रोकन्वल्सिव थेरेपी (Electroconvulsive Therapy यानी ECT) कहा जाता है। आइए जानते हैं इसके पीछे का वैज्ञानिक कारण और इससे जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य।
1. मानसिक बीमारी में बिजली का झटका क्यों दिया जाता है?
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि ECT का इस्तेमाल हर मानसिक बीमारी या हर मरीज के लिए नहीं किया जाता। डॉक्टर कुछ गंभीर मानसिक स्वास्थ्य स्थितियों में इस उपचार की सलाह दे सकते हैं, खासकर जब दूसरे उपचारों से पर्याप्त फायदा न हुआ हो या मरीज की स्थिति में तेजी से सुधार लाना जरूरी हो। उदाहरण के लिए, गंभीर डिप्रेशन, कुछ मामलों में बाइपोलर डिसऑर्डर से जुड़ी गंभीर मनोदशा संबंधी समस्याओं और कैटेटोनिया जैसी स्थितियों में ECT उपयोगी हो सकती है। कैटेटोनिया में व्यक्ति की गतिविधियां, बोलना या आसपास के वातावरण पर प्रतिक्रिया देना बहुत कम या असामान्य हो सकता है।
2. ECT में दिमाग के अंदर क्या होता है?
ECT के दौरान डॉक्टर नियंत्रित मात्रा में विद्युत ऊर्जा का उपयोग करके मस्तिष्क में थोड़े समय के लिए दौरा (Seizure) उत्पन्न करते हैं। यह प्रक्रिया अस्पताल में प्रशिक्षित चिकित्सा टीम की निगरानी में की जाती है। इस उपचार का मस्तिष्क पर सटीक प्रभाव अभी पूरी तरह समझा नहीं गया है। वैज्ञानिक शोध से संकेत मिलता है कि ECT मस्तिष्क की गतिविधियों, तंत्रिका कोशिकाओं के बीच संचार और मनोदशा से संबंधित कुछ जैविक प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकती है। इससे कुछ गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं में लक्षणों में सुधार हो सकता है। हालांकि, यह कहना सही नहीं है कि बिजली का झटका मस्तिष्क के दो हिस्सों के बीच मौजूद किसी गैर-जरूरी संबंध को तोड़ देता है। ECT के काम करने का तरीका इससे अधिक जटिल है।
3. क्या ECT देने से पहले मरीज को बेहोश किया जाता है?
हां, आधुनिक चिकित्सा में ECT सामान्यतः जनरल एनेस्थीसिया (General Anesthesia) और मांसपेशियों को आराम देने वाली दवा के साथ दी जाती है। इसका अर्थ है कि मरीज उपचार के दौरान बेहोश रहता है और मांसपेशियों की ऐंठन को नियंत्रित किया जाता है। इस कारण फिल्मों में दिखाए जाने वाले पुराने और डरावने दृश्यों से आधुनिक ECT की प्रक्रिया काफी अलग होती है। उपचार से पहले मरीज की स्वास्थ्य स्थिति का आकलन किया जाता है और उपचार के दौरान उसकी निगरानी की जाती है।
4. क्या ECT से मरीज पूरी तरह ठीक हो सकता है?
ECT से कुछ मरीजों में गंभीर लक्षणों में उल्लेखनीय सुधार हो सकता है, लेकिन इसका परिणाम हर व्यक्ति में एक जैसा नहीं होता। उपचार के बाद लक्षण दोबारा उभरने की संभावना भी हो सकती है। इसलिए डॉक्टर मरीज की स्थिति के अनुसार दवाओं, मनोचिकित्सा और नियमित फॉलो-अप की सलाह दे सकते हैं।
5. क्या बिजली के झटके देने से दिमाग को नुकसान होता है?
ECT के कुछ दुष्प्रभाव हो सकते हैं। उपचार के बाद कुछ समय तक सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, उलझन या याददाश्त से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। कुछ लोगों को उपचार के आसपास हुई घटनाओं को याद रखने में कठिनाई भी हो सकती है। याददाश्त पर पड़ने वाला प्रभाव व्यक्ति, उपचार के तरीके और दिए गए सत्रों के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। इसीलिए ECT देने का निर्णय विशेषज्ञ डॉक्टर मरीज की स्थिति, संभावित लाभ और जोखिम का आकलन करने के बाद लेते हैं। इसे घर पर या बिना चिकित्सकीय निगरानी के करने की कोशिश कभी नहीं करनी चाहिए।
निष्कर्ष
मानसिक बीमारी के कुछ गंभीर मामलों में बिजली से जुड़ी चिकित्सा प्रक्रिया ECT एक प्रभावी उपचार हो सकती है। इसका उद्देश्य मस्तिष्क की गतिविधियों को इस तरह प्रभावित करना है कि मरीज के गंभीर लक्षणों में सुधार हो सके। आधुनिक ECT में मरीज को बेहोश करके और चिकित्सा निगरानी में उपचार दिया जाता है। इसलिए इसे फिल्मों में दिखाए जाने वाले बिजली के झटकों से अलग समझना चाहिए। मानसिक बीमारी का उपचार हमेशा योग्य मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह से ही कराना चाहिए।
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