नज़ला-जुकाम के लिए सबसे असरदार काढ़ा कैसे बनाएं – पूरी जानकारी
बदलते मौसम, धूल-मिट्टी, ठंडी हवा या कमजोर इम्यूनिटी के कारण नज़ला-जुकाम होना बहुत सामान्य समस्या है। कई लोग तुरंत दवा लेते हैं, लेकिन आयुर्वेदिक काढ़ा एक सुरक्षित और प्राकृतिक उपाय है, जो शरीर को अंदर से गर्म रखता है, इन्फेक्शन से लड़ता है और बंद नाक, गले में खराश व खांसी को जल्दी ठीक करता है। अगर सही तरीके से काढ़ा बनाया जाए, तो यह नज़ला-जुकाम के लिए रामबाण साबित हो सकता है।
काढ़ा क्यों फायदेमंद है?
काढ़ा शरीर को प्राकृतिक रूप से डिटॉक्स करता है, इम्यूनिटी बढ़ाता है और श्वसन तंत्र को मजबूत बनाता है। इसमें मौजूद अदरक, तुलसी, हल्दी, काली मिर्च और शहद जैसे तत्व एंटी-वायरल और एंटी-बैक्टीरियल गुणों से भरपूर होते हैं। ये नाक की जकड़न खोलते हैं, बलगम को पतला करते हैं और गले की सूजन कम करते हैं।
नज़ला-जुकाम के लिए बेस्ट काढ़ा बनाने की सामग्री
एक कप काढ़ा बनाने के लिए आपको चाहिए:
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1 कप पानी
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1 छोटा टुकड़ा अदरक (कूटा हुआ)
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5–7 तुलसी के पत्ते
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½ छोटी चम्मच हल्दी
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4–5 काली मिर्च
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1 छोटा टुकड़ा दालचीनी
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2 लौंग
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½ चम्मच शहद (गुनगुने काढ़े में मिलाएं)
काढ़ा बनाने की सही विधि (Step-by-Step)
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एक बर्तन में 1 कप पानी डालकर उबालें।
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इसमें अदरक, तुलसी, काली मिर्च, लौंग और दालचीनी डालें।
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धीमी आंच पर 8–10 मिनट तक उबलने दें।
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जब पानी आधा रह जाए, तो गैस बंद कर दें।
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काढ़ा छान लें और थोड़ा ठंडा होने दें।
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गुनगुना होने पर इसमें शहद मिलाकर धीरे-धीरे पिएं।
काढ़ा पीने का सही समय
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सुबह खाली पेट 1 कप
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रात को सोने से पहले 1 कप
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जुकाम ज्यादा हो तो दिन में दो बार
यह काढ़ा लगातार 3–5 दिन पीने से नज़ला-जुकाम में काफी राहत मिलती है।
नज़ला-जुकाम में काढ़े के फायदे
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बंद नाक तुरंत खुलती है
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गले की खराश कम होती है
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खांसी में आराम मिलता है
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शरीर की गर्मी बनी रहती है
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इम्यूनिटी मजबूत होती है
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शरीर से विषैले तत्व बाहर निकलते हैं
ध्यान रखने योग्य बातें
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बहुत ज्यादा गर्म काढ़ा न पिएं।
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गर्भवती महिलाएं डॉक्टर से पूछकर ही सेवन करें।
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छोटे बच्चों को कम मात्रा दें।
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अगर तेज बुखार या गंभीर लक्षण हों तो डॉक्टर से सलाह लें।
