दुबई में रेगिस्तान होने के बावजूद इतनी बारिश कैसे हो जाती है? Latest facts in hindi
यह तो हम सभी जानते हैं कि रेगिस्तानी इलाकों में बारिश बहुत कम होती है। लेकिन जब बात दुबई की आती है तो एक सवाल जरूर मन में आता है कि दुबई भी तो रेगिस्तान के बीच बसा हुआ है, फिर वहां बारिश कैसे हो जाती है? इतना ही नहीं, कई बार दुबई और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में इतनी तेज बारिश भी देखने को मिलती है कि सड़कों पर पानी भर जाता है। आखिर इसके पीछे क्या कारण है?
दरअसल, दुबई की जलवायु गर्म और शुष्क रेगिस्तानी है, इसलिए यहां पूरे साल बारिश नहीं होती और सामान्य तौर पर वार्षिक वर्षा काफी कम रहती है। लेकिन रेगिस्तान का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि वहां वातावरण में नमी नहीं होती या कभी बारिश नहीं हो सकती। दुबई समुद्र के पास स्थित है, इसलिए अरब की खाड़ी से आने वाली नमी वातावरण में पहुंचती रहती है। जब यह नमी कुछ विशेष मौसम परिस्थितियों के साथ मिलती है तो बादल बन सकते हैं और बारिश हो सकती है।
बारिश बनने की प्रक्रिया को आसान भाषा में समझें तो वातावरण में मौजूद जलवाष्प ऊपर उठती है और ऊंचाई पर जाकर ठंडी होने लगती है। इसके बाद जलवाष्प छोटे-छोटे पानी के कणों में बदल जाती है और बादल बनते हैं। जब बादलों के अंदर मौजूद पानी की बूंदें पर्याप्त बड़ी और भारी हो जाती हैं, तो वे गुरुत्वाकर्षण के कारण नीचे गिरने लगती हैं। इन्हीं बूंदों के जमीन पर गिरने को हम बारिश कहते हैं।
दुबई में सामान्य दिनों में बारिश बहुत कम होती है, लेकिन कुछ विशेष मौसम प्रणालियां अरब प्रायद्वीप में काफी मात्रा में नमी लेकर आ सकती हैं। जब वातावरण में पर्याप्त नमी, ऊपर उठती हवा और अस्थिर मौसम जैसी परिस्थितियां एक साथ बनती हैं तो बड़े और घने बादल विकसित हो सकते हैं। ऐसे बादलों से कम समय में काफी ज्यादा बारिश भी हो सकती है।
इसका सबसे बड़ा उदाहरण अप्रैल 2024 में देखने को मिला था। उस समय संयुक्त अरब अमीरात में असाधारण रूप से भारी बारिश हुई थी। विश्व मौसम विज्ञान संगठन के अनुसार, UAE के Khatm Al Shakla क्षेत्र में 24 घंटे से भी कम समय में लगभग 254.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी। दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर भी 15 और 16 अप्रैल 2024 के दौरान लगभग 162.8 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई थी।
अब सवाल आता है कि क्या दुबई में होने वाली बारिश के पीछे Cloud Seeding यानी कृत्रिम रूप से बारिश बढ़ाने की तकनीक है?
संयुक्त अरब अमीरात वास्तव में Cloud Seeding तकनीक का इस्तेमाल करता है। इस तकनीक में विशेष विमानों की मदद से उपयुक्त बादलों में ऐसे छोटे कण पहुंचाए जाते हैं जो बादल के अंदर पानी की बूंदों के आपस में मिलने की प्रक्रिया को बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। UAE में इसके लिए मुख्य रूप से कुछ hygroscopic salts यानी नमी को आकर्षित करने वाले नमक का इस्तेमाल किया जाता है, जिनमें Sodium Chloride और Potassium Chloride शामिल हैं।
हालांकि यहां एक जरूरी बात समझना बहुत जरूरी है। Cloud Seeding का मतलब यह नहीं है कि बिना बादल के आसमान में जब चाहें तब बारिश कराई जा सकती है। इस तकनीक के लिए पहले से मौजूद उपयुक्त बादल और सही वातावरणीय परिस्थितियां जरूरी होती हैं। इसलिए Cloud Seeding को बारिश का एकमात्र कारण बताना सही नहीं होगा।
अप्रैल 2024 में दुबई और UAE में हुई रिकॉर्ड बारिश के बाद सोशल मीडिया पर यह दावा काफी तेजी से फैला था कि पूरी बारिश Cloud Seeding की वजह से हुई। लेकिन इतनी बड़ी और असाधारण बारिश को केवल Cloud Seeding के कारण हुई बारिश कहना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है। ऐसी घटनाओं में बड़े प्राकृतिक मौसम सिस्टम, वातावरण में मौजूद नमी और कई अन्य मौसम संबंधी परिस्थितियां महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
इसलिए अगली बार जब आप दुबई में तेज बारिश की खबर सुनें तो यह मत सोचिए कि रेगिस्तान में बारिश होना असंभव है। रेगिस्तान में बारिश कम जरूर होती है, लेकिन सही मौसम परिस्थितियां बनने पर वहां भी बादल बन सकते हैं और भारी बारिश हो सकती है। दुबई में Cloud Seeding का इस्तेमाल बारिश बढ़ाने के प्रयास के लिए किया जाता है, लेकिन वहां होने वाली हर बारिश का कारण Cloud Seeding नहीं होता।
यही वजह है कि दुबई का रेगिस्तान में होना और वहां बारिश होना एक-दूसरे के विपरीत नहीं हैं। समुद्र से आने वाली नमी, वातावरण की परिस्थितियां और प्राकृतिक मौसम प्रणालियां दुबई में बारिश के लिए जिम्मेदार हो सकती हैं, जबकि Cloud Seeding कुछ परिस्थितियों में बारिश को बढ़ाने में मदद करने वाली तकनीक है।
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