तम्बाकू से लोगो की मौत होती है तो सरकार इसे BAN क्यों नही करती है। Latest fact about Tambaku
दोस्तों, यह सवाल अक्सर लोगों के मन में आता है कि जब तंबाकू का सेवन कैंसर, हृदय रोग, फेफड़ों की बीमारी और समय से पहले मौत का कारण बन सकता है, तो सरकार तंबाकू को पूरी तरह बैन क्यों नहीं कर देती? आखिर जब इससे लोगों की जान को खतरा है, तो सिगरेट, बीड़ी, खैनी, जर्दा और दूसरे तंबाकू उत्पादों पर पूरी तरह प्रतिबंध क्यों नहीं लगाया जाता? यह सवाल जितना आसान लगता है, इसका जवाब उतना ही सीधा नहीं है। भारत में तंबाकू को पूरी तरह प्रतिबंधित करने के बजाय सरकार ने इसके उत्पादन, बिक्री, विज्ञापन और सेवन पर कई तरह के नियंत्रण और प्रतिबंध लगाए हैं।
भारत में तंबाकू से कितनी मौतें होती हैं?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार भारत में तंबाकू के सेवन से हर साल लगभग 13.5 लाख लोगों की मौत होती है। भारत में तंबाकू का सेवन करने वाले लोगों की संख्या भी काफी बड़ी है। WHO के अनुसार GATS-2 के आंकड़ों में 15 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लगभग 26.7 करोड़ लोग किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन करते थे। तंबाकू केवल कैंसर का खतरा ही नहीं बढ़ाता, बल्कि हृदय रोग, स्ट्रोक और फेफड़ों से जुड़ी कई गंभीर बीमारियों का जोखिम भी बढ़ाता है। WHO के अनुसार तंबाकू का कोई भी रूप पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जाता।
फिर सरकार तंबाकू को पूरी तरह बैन क्यों नहीं करती?
इसका सबसे महत्वपूर्ण कारण यह है कि तंबाकू पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना केवल स्वास्थ्य से जुड़ा विषय नहीं है। इसके साथ खेती, रोजगार, व्यापार, कानून लागू करने की क्षमता, उपभोक्ताओं की आदत और अवैध बाजार जैसे कई मुद्दे जुड़े हुए हैं। सरकार ने इसलिए तंबाकू को पूरी तरह कानूनी रूप से समाप्त करने के बजाय इसके इस्तेमाल को नियंत्रित करने के लिए अलग-अलग कानून और नियम बनाए हैं।
भारत में तंबाकू के खिलाफ कौन-कौन से नियम हैं?
भारत में COTPA यानी Cigarettes and Other Tobacco Products Act, 2003 लागू है। इसका उद्देश्य तंबाकू उत्पादों के विज्ञापन और प्रचार को नियंत्रित करना तथा इनके व्यापार, उत्पादन, आपूर्ति और वितरण से जुड़े मामलों को विनियमित करना है। इसके तहत सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान प्रतिबंधित है। तंबाकू उत्पादों की बिक्री 18 वर्ष से कम उम्र के लोगों को या उनके द्वारा करना प्रतिबंधित है। इसके अलावा शैक्षणिक संस्थानों के 100 गज के दायरे में तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर भी रोक है। तंबाकू उत्पादों के पैकेट पर निर्धारित स्वास्थ्य चेतावनियां प्रदर्शित करना भी अनिवार्य है। सार्वजनिक स्थान पर धूम्रपान करने पर COTPA के तहत 200 रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। इसके अलावा भारत में ई-सिगरेट और इसी तरह के इलेक्ट्रॉनिक निकोटीन डिलीवरी सिस्टम के उत्पादन, निर्माण, आयात, निर्यात, परिवहन, बिक्री, वितरण, भंडारण और विज्ञापन पर 2019 के कानून के तहत प्रतिबंध है।
क्या भारत में कुछ तंबाकू उत्पाद पहले से बैन हैं?
हां। यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। भारत में सभी तंबाकू उत्पादों पर एक जैसा प्रतिबंध नहीं है। उदाहरण के लिए, तंबाकू और निकोटीन को खाद्य उत्पादों में सामग्री के रूप में इस्तेमाल करने पर रोक है और इसी नियम के आधार पर तंबाकू वाले गुटखा पर प्रतिबंध लागू किया गया है। हालांकि अलग-अलग राज्यों में तंबाकू उत्पादों से जुड़े नियमों और उनके लागू होने की स्थिति में अंतर हो सकता है।
सरकार सीधे पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के बजाय नियंत्रण क्यों करती है?
अगर किसी ऐसे उत्पाद पर अचानक पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया जाए जिसका इस्तेमाल बड़ी संख्या में लोग करते हैं और जिसकी पूरी सप्लाई चेन मौजूद है, तो कानून लागू करने में कई व्यावहारिक चुनौतियां सामने आ सकती हैं। तंबाकू की खेती, बीड़ी निर्माण, प्रसंस्करण, बिक्री और इससे जुड़े दूसरे कामों में लोगों की आजीविका जुड़ी हुई है। उदाहरण के लिए WHO के अनुसार भारत में केवल बीड़ी उद्योग से जुड़े कामों में लगभग 49 लाख लोगों के रोजगार का अनुमान लगाया गया है। इसलिए किसी भी बड़े प्रतिबंध के साथ प्रभावित किसानों और कामगारों के लिए वैकल्पिक रोजगार तथा आजीविका का सवाल भी सामने आता है।
क्या पूरी तरह बैन करने से ब्लैक मार्केट बढ़ सकता है?
यह भी एक महत्वपूर्ण नीति संबंधी चुनौती हो सकती है। अगर किसी लोकप्रिय और आसानी से उपलब्ध उत्पाद पर अचानक पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाता है, तो अवैध बिक्री और तस्करी को रोकने के लिए मजबूत निगरानी और कानून-प्रवर्तन की आवश्यकता पड़ सकती है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि प्रतिबंध लगाने से अवैध बाजार निश्चित रूप से बढ़ेगा। इसका वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि प्रतिबंध किस तरह लागू किया जाता है, निगरानी कितनी प्रभावी है और लोगों को वैकल्पिक विकल्प तथा नशा छोड़ने की सहायता कितनी उपलब्ध कराई जाती है।
तंबाकू से सरकार को टैक्स भी मिलता है?
तंबाकू उत्पादों पर कर और दूसरे आर्थिक प्रभाव भी सरकार की नीति में एक पहलू हैं, लेकिन केवल टैक्स को तंबाकू पर प्रतिबंध न लगाने का एकमात्र कारण मानना सही नहीं होगा। WHO के अनुसार तंबाकू से होने वाली बीमारियों और मौतों का देश की अर्थव्यवस्था पर भी बड़ा आर्थिक बोझ पड़ता है। भारत में 2017-18 के दौरान 35 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों में तंबाकू से संबंधित बीमारियों और मौतों की आर्थिक लागत लगभग 1.77 लाख करोड़ रुपये आंकी गई थी। इसलिए तंबाकू से मिलने वाले राजस्व के साथ-साथ उससे होने वाली स्वास्थ्य और आर्थिक लागत को भी देखना जरूरी है।
सरकार का वर्तमान तरीका क्या है?
भारत की नीति का एक बड़ा हिस्सा तंबाकू की मांग को कम करने और लोगों को इसे छोड़ने के लिए प्रोत्साहित करने पर केंद्रित है। इसके लिए विज्ञापन और प्रचार पर प्रतिबंध, पैकेट पर स्वास्थ्य चेतावनी, सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान प्रतिबंध, नाबालिगों को बिक्री पर रोक और तंबाकू छोड़ने के लिए सहायता जैसी व्यवस्थाएं मौजूद हैं। भारत में सरकार की National Tobacco Quitline भी है, जहां तंबाकू छोड़ने के इच्छुक लोग मुफ्त सहायता प्राप्त कर सकते हैं। वर्तमान हेल्पलाइन नंबर 1800-11-2356 है।
निष्कर्ष
इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि सरकार तंबाकू के नुकसान को नजरअंदाज कर रही है। भारत में तंबाकू के खिलाफ कई कानून और नियंत्रण लागू हैं, लेकिन सभी तंबाकू उत्पादों पर एक साथ पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। इसके पीछे सार्वजनिक स्वास्थ्य के साथ-साथ किसानों और कामगारों की आजीविका, मौजूदा व्यापार व्यवस्था, कानून लागू करने की चुनौतियां, अवैध बाजार और लोगों की तंबाकू पर निर्भरता जैसे कई पहलू जुड़े हुए हैं। तंबाकू स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है और इससे हर साल बड़ी संख्या में लोगों की मौत होती है। इसलिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि लोग तंबाकू से होने वाले नुकसान को समझें और इसके सेवन से बचें। जो लोग तंबाकू छोड़ना चाहते हैं, वे सरकारी Tobacco Quitline 1800-11-2356 से सहायता ले सकते हैं।
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